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Thursday, May 09, 2013

स्‍वप्‍न और पहाड

 - राजेश जोशी 
स्‍वप्‍न अगर आसमान में थे 
तब वे पहाडों के सबसे करीब थे 

स्‍वप्‍न अगर मिट्टी में थे
राख और कुचली हुई पत्तियों में 
तो वे पहाडों के सबसे करीब थे 
स्‍वप्‍न अगर कहीं लुक कर बैठ गये थे 

तो हमें पूरा विश्‍वास था कि वे 
पहाडों में कहीं छिपे होंगे 
हम स्‍वप्‍नों कीक तलाश में गये थे 
पहाडों की ओर 
और हम जानते थे 
कि पहाड दोगले नहीं हुए हैं 
वे हमारी हिफाजत करते रहेंगे।